वरदविनायक चतुर्थी व्रत
'' वरदविनायक चतुर्थी व्रत '' इस तिथि पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत का विधान है। हिन्दू धर्म ग्रंथो और ज्योतिष विज्ञान में चतुर्थी तिथि का स्वामी भगवान श्री गणेश को माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गणपति की पूजा करनी चाहिए।
पूजन में गणेश जी को लड्डू का भोग लगाना चाहिए। सिंदूर या लाल चन्दन चढ़ाना चाहिये।
श्री गणेश मूल मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः ’ द्वारा भगवान की स्तुति करनी चाहिये।
शास्त्रों में गणपति की अराधना में तुलसी के पत्तों का प्रयोग वर्जित माना गया है।
भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा कर ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान देना चाहिये। इस व्रत को करने से पुण्य तो मिलता ही है, साथ ही संतान सुख, भौतिक सुख तथा लम्बी आयु की भी प्राप्ति होती है। व्रत करने वाले की रिद्धि-सिद्धि के साथ भाग्य वृद्धि भी होती है।
माना जाता है वरदविनायक चतुर्थी व्रत श्रद्धा व नियम पूर्वक साल भर करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।
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