संकष्टी गणेश चतुर्थी
"संकष्टी गणेश चतुर्थी इस दिन श्री विघ्नेश्वर गणेश जी की पूजा-अर्चना और व्रत करने से मनुष्य के सभी संकट दूर होते हैं.इसलिये इसे संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
इस दिन प्राण प्रतिष्ठित गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करके विधि विधान से उनकी पूजा करनी चाहिए।
जो इस व्रत को विधिवत करता है उस व्यक्ति को अपने किसी भी कार्य मे बाधा विघ्न नही आती । उसके घर गणेशजी के साथ रिद्धि-सिद्धि का भी वास होता है।
सुखकर्ता दुःखहर्ता गौरीकुमार भगवान श्री गणेश सबसे पहले पूजित होने वाले देवता हैं। जो विघ्नों का शमन तो करते ही हैं, कार्य सिद्धि में आशीर्वाद एवं सहयोग प्रदान करते हैं। इसलिए हर मन्दिर में गणेश जी का स्थान अहम होता है । विघ्नहर्ता मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश बिना कोई भी कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता। 'आदौ पूज्यो विनायक:'- इस उक्ति के अनुसार समस्त शुभ कार्यो के प्रारंभ में सिद्धिविनायक की पूजा आवश्यक है।
ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर ने विनायक को गणों का आधिपत्य प्रदान करके कार्यो में विघ्न डालने का अधिकार तथा पूजनोपरान्त विघ्न को शांत कर देने का अधिकार भी प्रदान किया। इसलिए किसी भी देवता के पूजन में सर्वप्रथम श्रीगणेश जी की पूजा होती है। ऐसा न करने पर वह व्रत-अनुष्ठान निष्फल हो जाता है। इसलिए ओमकार स्वरुप गणेश जी की श्रद्धापूर्वक पूजा करके ही सम्पूर्ण मनोरथ को पूरा किया जा सकता है।
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