Wednesday, August 25, 2010

Totalbhakti

स्वतन्त्रता दिवस


शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरने वालों का यहीं बाकी निशां होगा।

15 अगस्त भारतीय इतिहास का गौरवशाली दिन है। "15 अगस्त 1947" इसी दिन भारत वासियों ने लाखों कुर्बानियाँ देकर ब्रिटिश शासन से स्वतन्त्रता प्राप्त की थी।

इस वर्ष हम आजादी की 63वीं वर्ष गांठ मना रहे हैं। आज हम अपने महान राष्ट्रीय नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी श्रद्धांजली देते हैं - जिन्होंने विदेशी नियंत्रण से भारत को आजाद कराने के लिए अनेक बलिदान दिए और अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

स्वतन्त्रता संग्राम के यज्ञ का शुभारम्भ महर्षि दयानन्द सरस्वती ने 1857 में किया और इस यज्ञ की पहली आहूति दी मंगल पाण्ड़े ने। कुछ ही समय में यह यज्ञ पूरे देश में आंधी की तरह फ़ैल गया। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्यां टोपे और नाना राव जैसे योद्धाओं ने इस स्वतंत्रता के यज्ञ में अपने रक्त की आहुति दी। 'सरफरोशी की तमन्ना...' लिए रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव आदि देश के लिए शहीद हो गए। तिलक ने 'स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' का उदघोष किया तो सुभाष चन्द्र बोस ने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा' का मँत्र दिया। अहिंसा और असहयोग का अस्त्र लेकर महात्मा गाँधी और लौह पुरुष सरदार पटेल ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिये अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

15 अगस्त 1947 की आधी रात को अंग्रेजी चंगुल से आज़ाद हुआ भारत आज तरक्की के शिखर पर है। भारत ने लगभग हर क्षेत्र में अपना परचम फहराया है।

हमें आजादी स्वतः नही मिल गई थी अपितु एक लम्बे संधर्ष और हजारों लाखों लोगों के बलिदान के पश्चात ही भारत आजाद हो पाया था। अतः हमें स्वरतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए त्याग, बलिदान और कुर्बानियों को याद करके अपनी आजादी का जश्न मनाना चाहिए।

भारत को आजादी दिलाने के लिये शहीद हुए सभी शहीदों और इस आजादी को बरकरार रखने के लिये अपने प्राण गवांने वाले सेना के सभी जवानों को हमारी भावपूर्ण श्रदांजलि।

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