महालक्ष्मी पूजन
विष्णुप्रिये नमस्तुभ्यं जगद्धिते ।
अर्तिहंत्रि नमस्तुभ्यं समृद्धि कुरु में सदा ।।
‘लक्ष्मी ' उजाला, सुन्दरता, सौभाग्य और धन सम्पत्ति की देवी हैं। जिस घर भी जाती हैं, सुख-सम्पत्ति ऐश्वर्य, वैभव सब स्वतः ही आ जाता है।
लक्ष्मी पूजन के लिये सुबह घर को भली-भांति साफ़ कर लेना चाहिए। क्योकि माना जाता है जिस घर में साफ़ सफ़ाई और स्वच्छता रहती है वही लक्ष्मी जी अपने कदम रखती हैं, और जिस घर में ऐसा नही होता वहाँ दरिद्रता अपना डेरा जमा लेती है।
सुबह स्नान आदि करने के बाद चन्दन से बनी लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति के सामने सोलह अलग-अलग धागे में 16 गाँठ लगाकर उनका लक्ष्म्यै नमः से प्रत्येक गाँठ का पूजन करके लक्ष्मी जी की प्रतिमा का पूजन करें। पूजन के बाद ‘‘धनं धान्यं धरां हर्म्यं कीर्तिमायुर्यशः श्रियम् । तुरगान् दन्तिनः पुत्रवान महालक्ष्मि प्रयच्छ मे ।। ’’ से उस डोरे को दाहिने हाथ में बांधे और हरि घास के साथ 16 पत्ते और अक्षत लेकर कथा सुने। यदि सामर्थ्य हो तो लक्ष्मी पूजन और व्रत करने के बाद स्वर्ण के बने हुए कमल का दान करें। माना जाता है ऐसा करने से सभी प्रकार के दुःख दूर हो जाते हैं।
प्रसन्न्ता,उल्लास सौन्दर्य, सम्पत्ति की देवी लक्ष्मी जी का पूजन करने से सम्पूर्ण वैभव की प्राप्ति होती है।
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