अन्नपूर्णाष्टमी व्रत
अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे ।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्य भिक्षां देहि च पार्वति ।।
‘माता अन्नपूर्णा ' समस्त संसार का भरण पोषण करने वाली हैं। यह ही मनुष्यों को सुख-सौभाग्य, नित्य आनन्द, ऐश्वर्य और आश्रित को अभय प्रदान करने वाली हैं। धन-धान्य से सम्पन्न भूमि माता का जीता जागता स्वरुप हैं देवी अन्नपूर्णा।
श्री अन्नपूर्णा को माता पार्वती का ही स्वरुप बताया गया है। देवी अन्नपूर्णा की पुरी काशी है. काशी की पारम्परिक नवगौरी-यात्रा में आठवीं भवानी गौरी तथा नवदुर्गा-यात्रा में अष्टम् महागौरीका दर्शन-पूजन अन्नपूर्णा मंदिर में ही होता है।
अन्नपूर्णा माता की विधि पूर्वक पूजा करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। माता अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा अत्यन्त दयालु व वरदायिनी हैं। इनकी उपासना से अनेक जन्मों से चली आ रही दरिद्रता का निवारण हो जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिव की नगरी काशी में अन्न की कमी के कारण भयंकर स्थिति पैदा हो गई थी। जिसे देख भगवान शिव अत्यन्त विचलित हो उठे। तब भगवान शिव ने अन्नपूर्णा देवी से भिक्षा ग्रहण कर वरदान प्राप्त किया था। इस पर प्रसन्न हो भगवती अन्नपूर्णा ने उनकी शरण में आने वाले को कभी धन-धान्य से कभी वंचित नही होने का आशीष दिया था।
माना जाता है अन्नपूर्णा देवी की पूजा व उनकी उपासना करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
No comments:
Post a Comment